नेतृत्व

आम आदमी जो भारत का प्रधानमंत्री बना – नरेंद्र मोदी

उत्तरी गुजरात के मेहसाणा जिले में एक छोटे से कस्बे वाडनगर में 17 सितंबर, 1950 को जन्मे नरेंद्र मोदी एक ऐसी संस्कृति में पले-बढ़े, उनमें विनम्रता, परोपकार और समाज सेवा के मूल्य पिरोये। साठ के दशक में, बहुत छोटे होने के बावजूद उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान रेलवे स्टेशनों पर सैनिकों के गुजरने पर स्वैच्छिक तौर पर उनकी सेवा की।

1967 में उन्होंने गुजरात में बाढ़ पीड़ित लोगों की सेवा की। उत्कृष्ट संगठनात्मक क्षमताओं और मानव मनोविज्ञान के प्रति गहरी अंतर्दृष्टि से युक्त उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काम किया और गुजरात में विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में प्रमुख भूमिका निभायी।

बचपन से ही उनको कई विषमताओं और बाधाओं का मुकाबला करना पड़ा लेकिन उन्होंने महज चरित्र और साहस की क्षमता के जरिये चुनौतियों को अवसरों में बदल दिया। विशेष रूप से जब उन्होंने उच्चतर शिक्षा के लिए महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया तो उनका मार्ग कठिन संघर्षों से भरा था। लेकिन जीवन संघर्ष में वे हमेशा एक योद्धा, एक सच्चे सैनिक बने रहे। एक बार आगे कदम बढ़ाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उन्होंने मैदान छोड़ने या हारने से इनकार किया। यह उनकी प्रतिबद्धता थी जिसने उन्हें राजनीति शास्त्र में परास्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने के योग्य बनाया। उन्होंने भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम शुरू किया और नि:स्वार्थता, सामाजिक दायित्व, समर्पण और राष्ट्वाद की भावना को आत्मसात किया।

आरएसएस में काम करने के दौरान, श्री नरेंद्र मोदी ने 1974 के नवनिर्माण भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और उत्पीड़न भरे 19 माह (जून1975से जनवरी 1977) लंबे आपातकाल, जब भारतीय नागरिकों के मौलिक आधिकार कुचल दिये गये थे, समेत विभिन्न अवसरों पर विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभायीं। मोदी ने पूरी अवधि के दौरान भूमिगत रह कर और तत्कालीन केंद्र सरकार के तानाशाही तरीकों के खिलाफ साहसपूर्ण लड़ाई लड़ते हुए लोकतंत्र की मशाल को जलाये रखा।

उन्होंने भाजपा में शामिल हो कर 1987 में मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया। महज एक वर्ष के भीतर उन्हें गुजरात इकाई के महासचिव के स्तर पर प्रोन्नत कर दिया गया। उस समय तक वे पहले ही अत्यंत दक्ष संगठऩकर्ता की ख्याति अर्जित कर चुके थे। उन्होंने दृढ़निश्चय के साथ पार्टी कार्यकार्यकर्ताओं को उत्साहित करने का चुनौतीपूर्ण काम हाथ में लिया। पार्टी ने राजनीतिक लाभ प्राप्त करना शुरू कर दिया और अप्रैल, 1990 में केंद्र में गठबंधन सरकार का गठन किया। यह साझीदारी कुछ ही माह में खत्म हो गयी लेकिन भाजपा 1995 में गुजरात में स्वयं के दम पर दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आ गयी। तब से, भाजपा ही गुजरात में शासन करती रही है।

1988 से 1995 के बीच नरेंद्र मोदी की पहचान एक मुख्य रणनीतिज्ञ के तौर पर हुई जिसने गुजरात भाजपा को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी बनाने के लिए आवश्यक जमीनी कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न किया था। इस अवधि के दौरान, श्री मोदी को दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों, श्री लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा (एक अत्यंत लंबी यात्रा) और कन्याकुमारी (भारत का दक्षिणी किनारा) से उत्तर में कश्मीर तक की इसी तरह की यात्रा को आयोजित करने का दायित्व सौंपा गया था। 1998 में नयी दिल्ली में सत्ता संभालने तक भाजपा के आरोहण में इन दो अत्यधिक सफल कार्यक्रमों का योगदान रहा था जिन्हें अधिकांशत: श्री मोदी ने ही प्रबंधित किया था।

1995 में, वे पार्टी के राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किये गये और उन्हें भारत में पाँच प्रमुख राज्यों का प्रभार सौंपा गया जो एक युवा नेता के लिए दुर्लभ विशिष्टता थी। 1998 में, उन्हें महासचिव (संगठन) के रूप में प्रोन्नत किया गया जिस पद पर वे अक्टूबर, 2001 में भारत के सर्वाधिक समृद्ध और प्रगतिशील राज्यों में एक गुजरात का मुख्यमंत्री चुने जाने तक बने रहे। राष्ट्रीय स्तर पर अपने कार्यकाल के दौरान श्री नरेंद्र मोदी को जम्मू एवम् कश्मीर जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य और समान रूप से संवेदनशील पूर्वोत्तर राज्यों समेत विभिन्न राज्यस्तरीयइकाइयों के मामले देखने का दायित्व सौंपा गया। वह कई राज्यों में पार्टी संगठन के पुनरोद्धार के लिए जिम्मेदार थे। राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के दौरान श्री नरेंद्र मोदी पार्टी के एक महत्वपूर्ण प्रवक्ता के तौर पर उभरे और विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों पर मुख्य भूमिका निभायी।

इस अवधि के दौरान, उन्होंने विश्व भर में सघन यात्राएँ कीं और विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण नेताओं से संवाद किया। इन अनुभवों से उन्हें न सिर्फ वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिली बल्कि भारत की सेवा और इसे राष्ट्रों के समुदाय में सामाजिक-आर्थिक वर्चस्व की ओर ले जाने की धुन को भी तीव्र किया।

अक्टूबर, 2001 में, पार्टी ने उन्हें गुजरात में सरकार का नेतृत्व करने के लिए बुला लिया। 7 अक्टूबर, 2001 को जब श्री मोदी की सरकार ने शपथ ग्रहण किया, तब गुजरात की अर्थव्यवस्था जनवरी, 2001में आये व्यापक भूकंप समेत विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रतिकूल प्रभावों के तल दबी थी। लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और अनुभव से समृद्ध मास्टर रणनीतिकार श्री नरेंद्र मोदी ने बैल को उसके सींग से पकड़ने का निर्णय किया।

मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने पर उन्हें जिस सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, वह था जनवरी, 2001 के व्यापक भूकंप से प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास का कार्य। भुज मलबे का शहर हो चुका था और हजारों लोग बिना किसी मूलभूत सुविधा के अस्थायी शरणस्थलियों में रह रहे थे। आज भुज इस बात का प्रमाण है कि श्री नरेंद्र मोदी ने कैसे विपत्ति को समग्र विकास के लिए एक अवसर में बदल दिया।

यहाँ तक कि जब पुनर्निर्माण और पुनर्वास का काम जारी था, तब भी श्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी तस्वीर के प्रति दृष्टिकोण को नहीं खोया। गुजरात ने हमेशा औद्योगिक विकास पर जोर दिया था। श्री नरेंद्र मोदी ने एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सामाजिक क्षेत्रों पर समुचित ध्या दे कर असंतुलन को ठीक करने का निर्णय लिया। उन्होंने राज्य के एकीकृत विकास के लिए एक पंच-सूत्री रणनीति – पंचामृत योजना की कल्पना की।

उनके नेतृत्व के अंतर्गत गुजरात ने शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य व कई अन्य समेत विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा। उन्होंने राज्य के भविष्य के लिए अपना स्वयं का स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित किया, नीति-संचालित सुधार कार्यक्रम शुरू किये, गुजरात के प्रशासनिक ढाँचे का पुनर्विन्यास किया और गुजरात को सफलतापूर्वक समृद्धि के मार्ग पर ले गये।
उनकी मंशा और क्षमता उनके सत्ता में आने के प्रथम 100 दिनों में ही दिख गयी। इसमें आश्चर्य नहीं है कि इन कौशलों ने उनकी प्रशासनिक सूझ-बूझ, स्पष्ट दृष्टिकोण और चरित्र की शुद्धता के साथ मिल कर दिसंबर, 2002 के आम चुनाव में भारी बहुमत के साथ जीत दिलायी और मोदी सरकार को 182 विधयकों के सदन में 128 सीटों के भारी बहुत के साथ सत्ता में वापसी का जनादेश मिला। यह शानदार प्रदर्शन 2007 में भी जारी रहा जब श्री मोदी ने एक और चुनाव में भाजपा को रिकॉर्ड जीत दिलायी।

श्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर, 2012 को गुजरात की जनता की सेवा में रिकॉर्ड 4000 दिन पूरे किये। उन्हें लगातार तीन चुनावों में गुजरात जनता के समर्थन का सौभाग्य मिल चुका है। 2002 और 2007 (117 सीट) के चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने के बाद श्री मोदी ने 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को एक और विजय दिलायी। भाजपा 115 सीटों पर विजयी हो कर उभरी और श्री मोदी ने 26 दिसंबर, 2012 को लगातार चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

आज जनता की उम्मीदों से ज्यादा वादे पूरे किये जा चुके हैं। आज गुजरात ई-गवर्नेंस, निवेश, गरीबी उन्मूलन, बिजली, विशेषआर्थिक जोन, सड़क विकास, राजकोषीय अनुशासन और कई अन्य क्षेत्रों समेत विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में देश का नेतृत्व कर रहा है। इसके विकास की कहानी किसी एक क्षेत्र के विकास पर नहीं, बल्कि सभी तीन क्षेत्रों (कृषि, उद्योग और सेवाएँ) के विकास पर आधारित है। गुजरात के सुदृढ़ विकास का कारण श्री मोदी का सबका साथ, सबका विकास का मंत्र और जनोन्मुख, सक्रिय सुशासन (पी2जी2) पर उनका जोर है जिसके तहत उन्होंने राज्य की प्रगति में गुजरात की जनता को सक्रिय साझीदार बना दिया।

सभी कठिनाइयों से लड़ते हुए उन्होंने नर्मदा बाँध की ऊँचाई को 121.9 मीटर तक पहुँचाना सुनिश्चित किया – यहाँ तक कि उन्होंने निरमाण में अड़चन डालने वालों के प्रतिकार के तौर पर उपवास भी किया। गुजरात में जन संसाधनों का एक ग्रिड बनाने के लिए “सुजलाम सुफलाम” नामक योजना जल संरक्षण और इसके समुचित उपयोग की दिशा में एक और नवोन्मेषी कदम है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड, रोमिंग राशन कार्ड और रोमिंग स्कूल कार्ड लागू करने जैसे अनूठे विचार राज्य के सर्वाधिक आम लोगों के प्रति उनकी चिंता को प्रदर्शित करते हैं।
कृषि महोत्सव, चिरंजीवी योजना, मातृ वंदना, बेटी बचाओ अभियान (स्त्री शिशु संरक्षण), ज्योतिग्राम योजना और कर्मयोगी अभियान, ई-ममता, ईएमपावर,स्कोप, आईक्रियेट इत्यादि जैसी उनकी पहलकदमियों का उद्देश्य गुजरात का बहु-आयामी विकास रहा है। इन पहलकदमियों की दृष्टि, अवधारणा और समय-बद्ध क्रियान्वयन ने ही श्री नरेंद्र मोदी की छवि केवल अगले चुनाव भर तक की सोच सकने वाले राजनीतिज्ञों के मुकाबले एक ऐसे सच्चे राजनेता की बनायी जो अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है।

नवोन्मेषी विचारों के साथ एक युवा और ऊर्जावान जननेता के रूप में वायपक रूप से सम्मानित श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की जनता तक अपना दृष्टिकोण सफलतापूर्वक संप्रेषित किया है और गुजरात के 6 करोड़ से अधिक लोगों के बीच विश्वास और भरोसा जगाने में समर्थ रहे हैं। लाखों लोगों, यहाँ तक कि आम लोगों तक को उनके पहले नाम से संबोधित करने की उनकी उत्कृष्ट स्मरण शक्ति ने उनको जनता का प्रिय बना दिया है। आध्यात्मिक नेताओं के प्रति उनके अगाध सम्मान ने सभी धर्मों के बीच सेतु निर्माण में मदद की है। सभी आय समूहों, धर्मों और यहाँ तक कि राजनीतिक जुड़ाव से ऊपर उठ कर गुजरात की जनता का एक बड़ा हिस्सा श्री नरेंद्र मोदी को एक सक्षम और स्वप्नदर्शी नेता के रूप में देखता है जो उनके जीवन की गुणवत्ता को पारदर्शिता और प्रभावकारी तरीके से ऊपर उठा रहा है। कुशल वक्ता और चतुर वार्ताकार श्री मोदी ने गाँवों और शहरों में समान रूप से लोगों का प्यार अर्जित किया है। उनके समर्थकों में हर संप्रदाय और धर्म और समाज के प्रत्येक आर्थिक तबके के लोग शामिल हैं।

यह उनका सक्षम नेतृत्व ही है कि गुजरात ने आपदा न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र सासाकावा अवार्ड, शासन में नवोन्मेष के लिए कॉमनवेल्थ एसोसिएशन फॉर पब्लिक ऐडमिनिस्ट्रेशन ऐंड मैनेजमेंट (सीएपीएएम) अवार्ड, युनेस्को अवार्ड, ई-गवर्नेंस के लिए सीएसआई अवार्ड इत्यादि समेत पूरी दुनिया से विभिन्न पुरस्कार और सराहना हासिल किया है। निरंतर तीन वर्ष तक जनता द्वारा श्री नरेंद्र मोदी को देश का नंबर एक मुख्यमंत्री चुने जाने का तथ्य उनकी उपलब्धियों की मात्रा को बताता है।

गुजरात को अनिवार्य रूप से वैश्विक मानचित्र पर रखने का उनका मास्टरस्ट्रोक वाइब्रेंट गुजरात नामक जारी अभियान है जिसने गुजरात को सच्चे अर्थों में सर्वाधिक पसंदीदा निवेश स्थलों में एक के रूप में परिवर्तित कर दिया है। 2013 वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में विश्व के 120 से अधिक देशों ने भागीदारी की जो अपने-आप में एक सराहनीय उपलब्धि है।

गुजरात पिछले कई वर्षों से दो अंकों में विकास दर दर्ज करता रहा है। जहाँ गुजरात का प्रगति और विकास के पथ पर तेजी से बढ़ना जारी है, वहीं इसके नाविक की कदम-दर-कदम, कीर्तिमान-दर-कीर्तिमान बदलते हुए समय की रेत पर अपने पदचिह्न पीछे छोड़ते हुए अथक यात्रा जारी है।

यहाँ तक कि राजनीति में जमीनी कार्यकर्ता से शासक तक की उनकी यात्रा का सिंहावलोकन एक नेता के रूप में उनके सदैव बढ़ते कद की मात्रा को बतायेगा।

अगर किसी को नेतृत्व की अवधारणा और आदर्श को देखना है तो यह एक शास्त्रीय प्रेरणास्रोत है कि कैसे चरित्र, साहस, समर्पण और दृष्टि से संपन्न एक युवा एकाएक रचनात्मक नेतृत्व के रूप में पुष्पित हो उठता है। सार्वजनिक जीवन में, यह देखना बहुत आम नहीं है कि गहरी सेवा भावना और स्थिर उद्देश्य के एक आदमी को वे लोग बहुत प्यार करते हैं जिन्हें वह डूब के प्यार करता है। वे बहुत कम अवधि में प्रारब्ध के व्यक्ति के रूप में उभरे।

श्री नरेंद्र मोदी एक महान दूरदृष्टा हैं जनके पास अपने सपनों को हकीकत में बदल देने की असाधारण क्षमता है। उनका सर्वोच्च सपना गुजरात का उत्थान और कायाकल्प, और अंतत: अपनी मातृभूमि का एक विकसित और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरना है। भारत के लिए उनके सपने का दायरा बहुत व्यापक है – जैसे कृषि अनुसंधानको आवश्यक रूप से बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण, उद्योग और वैश्विक निवेश की जीवनरेखा के रूप में आधारभूत ढाँचा। संक्षेप में, जीवन के अंतहीन उत्सवों को मनाते एक नये और प्रसन्नचित्त समाज का उभार! श्री नरेंद्र मोदी की ख्याति एक कठिन बॉस और कड़े अनुशासनप्रिय होने के रूप में है लेकिन साथ ही वह शक्ति और करुणा के अवतार भी हैं।

वे ऐसे व्यक्ति हैं जिसे समाज को घनेरे अंधेरे, निराशा और गरीबी से बहुत दूर संपूर्ण मानव विकास और प्रगति तक ले जाने के माध्यम के रूप में शिक्षा पर अगाध विश्वास है। उन्होंने शिक्षा के प्रसार, विशेष रूप से अब तक उपेक्षित लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया है।

शिक्षा के प्रति श्री नरेंद्र मोदी का प्यार शिक्षकों के प्रति उनके सम्मान और कन्या केलावानी योजना में झलकता है। यह पहल, जो उनके हृदय के अत्यंत निकट है, जमीनी स्तर पर ज्ञानोदय और सशक्तीकरण के एक नये युग का सूत्रपात कर रही है। गर्मी और गंदगी के बीच दूर-दराज के गाँवों में डेरा डाल कर अभिभावकों को उनकी बेटियों को शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करने वाला मुख्यमंत्री आप और कहाँ पायेंगे?

प्रौद्योगिकी और विज्ञान में गहरी अभिरुचि के साथ श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात को एक ई-शासित राज्य में बदल दिया है और प्रौद्योगिकी के कई नवोन्मेषी अनुप्रयोगों को तीव्र किया है। स्वागत ऑनलाइन और ई-फरियाद जैसी पहलकदमियों से ई-पारदर्शिता आयी है और इसने प्रशासन के शीर्षस्थ कार्यालय से नागरिकों का सीधा संपर्क जोड़ दिया है। यह देखना अत्यंत दुर्लभ है कि कोई मुख्यमंत्री आम आदमी की शिकायतों को इतने ध्यान से सुनता है और यह सुनिश्चित करता है कि वह मुद्दा एक निश्चित समय-सीमा में हल हो जाये।

लोगों पर अगाध विश्वास रखने वाले श्री नरेंद्र मोदी ने कर्मयोगी महा अभियाननामक एक ‘निरंतर सीखने’ की पहल के जरिये सक्रियता उन्मुख कार्य संस्कृति के नये दौर में ले जाने के लिए 5 लाख सरकारी कर्मचारियों की टीम का दक्षतापूर्वक नेतृत्व किया है। गुजरात के पास ऐसा मुख्यमंत्री रहा जो सरकारी कर्मचारियों को असरकारी कर्मयोगियों (प्रभावी कर्मचारियों की टोली) में बदलने के लिए इतना चिंतित रहा।

श्री नरेंद्र मोदी तगड़ी आशावादिता केसाथ व्यावहारिक और आदर्शवादी, दोनों हैं। उन्होंने यह परोपकारी दृष्टि आत्मसात की है कि विफलता नहीं, बल्कि छोटा लक्ष्य रखना अपराध है। वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में उपलब्धि के लिए दृष्टि की स्पष्टता, उद्देश्य की भावना और परिश्रमपूर्वक प्रयास को महत्व देते हैं। अपनी मातृभूमि और लोगों के लिए चिंता उनके मस्तिष्क में सबसे ऊपर रहती है।